आज है विश्व पशु दिवस, योगेंद्र ने पशु-पक्षियों के उपचार के लिए घर को बनाया अस्पताल

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पशुओँ से क्रूरता के मामले तो सामने आए हैं मगर देश में ऐसे भी लोग हैं जो जानवरों की देखभाल के लिए व्यक्तिगत स्तर पर असाधारण प्रयास कर रहे हैं। आइए जानें ऐसे लोगों के बारे में।

अल्मोड़ा। जिले की सामाजिक कार्यकर्ता कामिनी कश्यप 30 साल से पशु कल्याण के मिशन में जुटी हैं। घर के पास एक बाड़े में वह 46 आवारा कुत्तों की देखभाल कर रही हैं, जबकि 32 गाय, 12 बकरियां व 10 भैंस भी हैं। कामिनी को जहां भी आवारा जानवर दिखाई देते हैं वे उन्हें अपने घर लाती हैं। 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने उन्हें सम्मानित किया था।

गोरखपुर। जिले के वरुण कुमार वर्मा ‘वैरागी’ पशुधन प्रसाद अधिकारी रहे हैं। 72 साल के वैरागी सेवानिवृत्ति के बाद भी पशुओं की देखभाल में जुटे हैं। कहीं से भी किसी की भी सूचना मिल जाए कि पशु बीमार पड़ा है तो वरुण तत्काल मौके पर पहुंच जाते हैं। उन्होंने अपने आवास का नाम पशु-पक्षी सेवाश्रम रखा है, जो किसी अस्पताल या सेवास्थल से कम नहीं है।

धनबाद। शहर के तीन युवाओं ने शहर के बीमार जानवरों के इलाज का जिम्मा संभाला है। अभियान के संचालक रितेश सिंह का कहना है कि एक साल से वे लोग बीमार जानवरों के इलाज करा रहे है। वहीं, कोल इंडिया में कार्यरत भरतिया दस हज़ार से ज्यादा गोवंश को कसाइयों और तस्करों और से बचा चुके हैं क बीमार या लावारिस गायों को वे गोशाला भिजवा देते हैं। दुर्घटना या अन्य कारणों से मृत 100 से अधिक गायों का अंतिम संस्कार भी उन्होंने कराया।

नई दिल्ली। दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में रहने वाली ज्योतिषाचार्य रेखा वोहरा पशु-पक्षियों के लिए किसी हेल्पलाइन से कम नहीं हैं। किसी घायल पशु या पक्षी की जानकारी मिलने पर वह तुरंत मदद को पहुंच जाती हैं। उन्होंने 60 से ज्यादा ‘स्ट्रीट डाग्स’ से ज्यादा कुत्तों को गोद भी ले रखा है। इन कुत्तों को वे सुबह शाम खाना भी खिलाती हैं। हाल ही में उन्हें लकवाग्रस्त कुत्ते के बारे में पता चला। उसे वे अपने साथ ले आईं और उपचार के बाद वह काफी हद तक ठीक है।

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